ऋग्वेद (मंडल 4)
अ॒स्माकं॑ त्वा मती॒नामा स्तोम॑ इन्द्र यच्छतु । अ॒र्वागा व॑र्तया॒ हरी॑ ॥ (१५)
हम स्तुतिकर्तताओं की स्तुतियां तुम्हें हमारे पास लावें. अपने हरि नामक दोनों घोड़ों को हमारे सामने लाओ. (१५)
May we bring you the praises of the praises of the praises to us. Bring before us both your horses called Hari. (15)