हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.32.16

मंडल 4 → सूक्त 32 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
पु॒रो॒ळाशं॑ च नो॒ घसो॑ जो॒षया॑से॒ गिर॑श्च नः । व॒धू॒युरि॑व॒ योष॑णाम् ॥ (१६)
हे इंद्र! तुम हमारे द्वारा पकाए गए पुरोडाश का भक्षण करो. कामी लोग जिस प्रकार नारी की बात पूरी करते हैं, उसी प्रकार तुम हमारी स्तुति सार्थक करो. (१६)
O Indra! You eat the purodash cooked by us. Just as the kaamis fulfill the words of the woman, so do you make our praise worthwhile. (16)