ऋग्वेद (मंडल 4)
स न॑श्चि॒त्राभि॑रद्रिवोऽनव॒द्याभि॑रू॒तिभिः॑ । अना॑धृष्टाभि॒रा ग॑हि ॥ (५)
हे वज्रधारी इंद्र! तुम मनोहर, अनिंदित एवं दूसरों द्वारा आक्रमणरहित रक्षासाधनों को लेकर हमारे सामने आओ. (५)
O thunderbolt Indra! You come before us with charming, unsimpressed and uninvaded defense tools by others. (5)