हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.32.5

मंडल 4 → सूक्त 32 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
स न॑श्चि॒त्राभि॑रद्रिवोऽनव॒द्याभि॑रू॒तिभिः॑ । अना॑धृष्टाभि॒रा ग॑हि ॥ (५)
हे वज्रधारी इंद्र! तुम मनोहर, अनिंदित एवं दूसरों द्वारा आक्रमणरहित रक्षासाधनों को लेकर हमारे सामने आओ. (५)
O thunderbolt Indra! You come before us with charming, unsimpressed and uninvaded defense tools by others. (5)