ऋग्वेद (मंडल 4)
स॒जोष॑स आदि॒त्यैर्मा॑दयध्वं स॒जोष॑स ऋभवः॒ पर्व॑तेभिः । स॒जोष॑सो॒ दैव्ये॑ना सवि॒त्रा स॒जोष॑सः॒ सिन्धु॑भी रत्न॒धेभिः॑ ॥ (८)
हे ऋभुओ! तुम आदित्यों, पर्व के समय पूजे जाने वाले देवों एवं रत्नदान करने वाली नदियों के साथ मिलकर प्रसन्न बनो. (८)
Hey, Lord! Be happy to join the Adityas, the gods worshipped at the time of the festival and the rivers that give gems. (8)