ऋग्वेद (मंडल 4)
उप॑ नो वाजा अध्व॒रमृ॑भुक्षा॒ देवा॑ या॒त प॒थिभि॑र्देव॒यानैः॑ । यथा॑ य॒ज्ञं मनु॑षो वि॒क्ष्वा॒३॒॑सु द॑धि॒ध्वे र॑ण्वाः सु॒दिने॒ष्वह्ना॑म् ॥ (१)
हे सुंदर ऋभु.ओ एवं वाजगण! जिस प्रकार तुम दिवसों को शोभन बनाने के लिए मनुष्यों का यज्ञ धारण करते हो, उसी प्रकार देवमार्गो द्वारा हमारे यज्ञ में आओ. (१)
O beautiful Sage.o and Vajgan! Just as you perform the yajna of men to make the days a decoration, so come to our yajna through devamargo. (1)
ऋग्वेद (मंडल 4)
ते वो॑ हृ॒दे मन॑से सन्तु य॒ज्ञा जुष्टा॑सो अ॒द्य घृ॒तनि॑र्णिजो गुः । प्र वः॑ सु॒तासो॑ हरयन्त पू॒र्णाः क्रत्वे॒ दक्षा॑य हर्षयन्त पी॒ताः ॥ (२)
आज हमारे वे सभी यज्ञ तुम्हारे मन को प्रसन्न करने वाले बनें एवं घी से मिला हुआ सोमरस तुम्हें प्राप्त हो. चमस में भरा हुआ सोमरस तुम्हारी इच्छा करता है. वह पीने के पश्चात् तुम्हे यज्ञकर्म के लिए प्रेरित करे. (२)
Today, let all those sacrifices of ours be pleasing to your mind and you get the somras mixed with ghee. Sommers stuffed in a spoon makes your wish. He should inspire you to perform yajnakarma after drinking. (2)
ऋग्वेद (मंडल 4)
त्र्यु॒दा॒यं दे॒वहि॑तं॒ यथा॑ वः॒ स्तोमो॑ वाजा ऋभुक्षणो द॒दे वः॑ । जु॒ह्वे म॑नु॒ष्वदुप॑रासु वि॒क्षु यु॒ष्मे सचा॑ बृ॒हद्दि॑वेषु॒ सोम॑म् ॥ (३)
हे वाजगण एवं ऋभुगण! तीनों सवनों में पीने योग्य एवं देवहितकारी सोम को जो लोग तुम्हें देते हैं, इसी प्रकार के लोगों के बीच एकत्र होकर एवं परम दिव्य प्रकाशयुक्त देवों के मध्य मनु के समान बनकर हम तुम्हारे उद्देश्य से सोम धारण करते हैं. (३)
O Vajgan and Rijgan! In all the three saawans, the people who give you the drinkable and god-helping soma, gather among such people and become like Manu among the gods with the ultimate divine light, we hold som for your purpose. (3)
ऋग्वेद (मंडल 4)
पीवो॑अश्वाः शु॒चद्र॑था॒ हि भू॒तायः॑शिप्रा वाजिनः सुनि॒ष्काः । इन्द्र॑स्य सूनो शवसो नपा॒तोऽनु॑ वश्चेत्यग्रि॒यं मदा॑य ॥ (४)
हे ऋभु.ओ! तुम स्वस्थ घोड़ों एवं दीप्तियुक्त रथ वाले हो. तुम्हारी ठोड़ियां लोहे के समान हैं. तुम अन्न के स्वामी एवं उत्तम दानशील हो. हे इंद्र के पुत्रो एवं बल की संतानो! यह प्रातःकाल का यज्ञ तुम्हारी प्रसन्नता के लिए किया गया है. (४)
O Ribhu.o! You are healthy horses and radiant chariots. Your chins are like iron. You are the master of food and the best donor. O sons of Indra and children of strength! This morning yajna has been done for your happiness. (4)
ऋग्वेद (मंडल 4)
ऋ॒भुमृ॑भुक्षणो र॒यिं वाजे॑ वा॒जिन्त॑मं॒ युज॑म् । इन्द्र॑स्वन्तं हवामहे सदा॒सात॑मम॒श्विन॑म् ॥ (५)
हे ऋभुओ! हम अत्यंत रूप से बढ़ने वाले धन, संग्राम में परम शक्तिशाली रक्षक तथा सदा दानशील, अश्वां से युक्त एवं इंद्र से संबंधित तुम्हारे गण को पुकारते हैं. (५)
Hey, Lord! We call upon your people who are extremely powerful protectors in the growing wealth, the struggle, and always the giver, the one with the ashwas and belonging to Indra. (5)
ऋग्वेद (मंडल 4)
सेदृ॑भवो॒ यमव॑थ यू॒यमिन्द्र॑श्च॒ मर्त्य॑म् । स धी॒भिर॑स्तु॒ सनि॑ता मे॒धसा॑ता॒ सो अर्व॑ता ॥ (६)
हे ऋभुओ! तुम एवं इंद्र जिस व्यक्ति की रक्षा करते हो, वही श्रेष्ठ बुद्धियों से युक्त एवं यज्ञ में अश्वयुक्त बनता है. (६)
Hey, Lord! The person whom you and Indra protect, the one who possesses the best of intellects and becomes the one who is in the yagna. (6)
ऋग्वेद (मंडल 4)
वि नो॑ वाजा ऋभुक्षणः प॒थश्चि॑तन॒ यष्ट॑वे । अ॒स्मभ्यं॑ सूरयः स्तु॒ता विश्वा॒ आशा॑स्तरी॒षणि॑ ॥ (७)
हे वाजगण एवं ऋभुओ! हमें यज्ञ का मार्ग बताओ. हे मेधावियो! हमें अपनी स्तुति के बदले सारी दिशाओं को जीतने वाला बल दो. (७)
O Vajgan and Rybhuo! Tell us the path of yajna. O genius! Give us the strength to conquer all directions in exchange for your praise. (7)
ऋग्वेद (मंडल 4)
तं नो॑ वाजा ऋभुक्षण॒ इन्द्र॒ नास॑त्या र॒यिम् । समश्वं॑ चर्ष॒णिभ्य॒ आ पु॒रु श॑स्त म॒घत्त॑ये ॥ (८)
हे वाजगण, ऋभुओ, इंद्र एवं अश्चिनीकुमारो! तुम हम स्तुतिकर्तता लोगों को देने के निमित्त अधिक मात्रा में धन एवं अन्न का वचन दो. (८)
O Vajgana, Ribhuo, Indra and Aschinikumaro! You should promise us a large amount of money and food to give to the people of praise. (8)