ऋग्वेद (मंडल 4)
द॒धि॒क्राव्ण॒ इदु॒ नु च॑र्किराम॒ विश्वा॒ इन्मामु॒षसः॑ सूदयन्तु । अ॒पाम॒ग्नेरु॒षसः॒ सूर्य॑स्य॒ बृह॒स्पते॑राङ्गिर॒सस्य॑ जि॒ष्णोः ॥ (१)
हम दधिक्रा देव की शीघ्र स्तुति करते हैं. समस्त उषाएं हमें यज्ञकर्म की प्रेरणा दें. हम जल, अग्नि, उषा, सूर्य, बृहस्पति एवं अंगिरापुत्र जिष्णु की स्तुति करेंगे. (१)
We praise The Dalai God quickly. May all the ushas inspire us to perform yajnakarma. We will praise Jal, Agni, Usha, Sun, Jupiter and Angiraputra Jishnu. (1)
ऋग्वेद (मंडल 4)
सत्वा॑ भरि॒षो ग॑वि॒षो दु॑वन्य॒सच्छ्र॑व॒स्यादि॒ष उ॒षस॑स्तुरण्य॒सत् । स॒त्यो द्र॒वो द्र॑व॒रः प॑तंग॒रो द॑धि॒क्रावेष॒मूर्जं॒ स्व॑र्जनत् ॥ (२)
चलने वाले, भरणकुशल, गायों को प्रेरित करने वाले एवं सेवा के इच्छुकों में रहने वाले दधिक्रा देव इच्छित उषाकाल में अन्न की कामना करें. शीघ्रता से चलने वाले, सत्यरूप से चलने वाले, वेगशाली एवं उछल-उछल कर चलने वाले दधिक्रा देव अन्न, बल एवं स्वर्ग को उत्पन्न करें. (२)
The Dadhidra Dev, who walks, is a sustenance, an apostle of cows and who is willing to serve, may wish for food during the desired usaal. May the god, who walks quickly, walks truthfully, and leaps and jumps, create food, strength, and heaven. (2)
ऋग्वेद (मंडल 4)
उ॒त स्मा॑स्य॒ द्रव॑तस्तुरण्य॒तः प॒र्णं न वेरनु॑ वाति प्रग॒र्धिनः॑ । श्ये॒नस्ये॑व॒ ध्रज॑तो अङ्क॒सं परि॑ दधि॒क्राव्णः॑ स॒होर्जा तरि॑त्रतः ॥ (३)
जिस प्रकार पक्षीसमूह पक्षियों के पीछे-पीछे उड़ता है, उसी प्रकार वेगवान् लोग शीघ्र चलने वाले एवं अधिक अभिलाषायुक्त दधिक्रा देव का अनुगमन करें. वे श्येन पक्षी के समान तेज उड़ने वाले एवं रक्षक हैं. सब लोग अन्न की इच्छा से इनके साथ चलते हैं. (३)
Just as the bird group flies after the birds, so the vegans should follow the fast-moving and more desireful Dadikdra Dev. They are as fast as the lion bird and the protectors. Everyone walks with them with the desire for food. (3)
ऋग्वेद (मंडल 4)
उ॒त स्य वा॒जी क्षि॑प॒णिं तु॑रण्यति ग्री॒वायां॑ ब॒द्धो अ॑पिक॒क्ष आ॒सनि॑ । क्रतुं॑ दधि॒क्रा अनु॑ सं॒तवी॑त्वत्प॒थामङ्कां॒स्यन्वा॒पनी॑फणत् ॥ (४)
अश्वरूपी दधिक्रा देव ग्रीवा, कक्षा एवं मुख में बंधे होकर भी चलने के लिए शीघ्रता करते हैं. ये अधिक बलशाली होकर यज्ञ की ओर जाने वाले टेढ़े रास्तों पर सब जगह शीघ्र चलते हैं. (४)
Ashwarupi Dadhikra Dev is quick to walk even when he is tied in the neck, orbit and mouth. They are more powerful and quickly walk everywhere on the crooked paths leading to the yagna. (4)
ऋग्वेद (मंडल 4)
हं॒सः शु॑चि॒षद्वसु॑रन्तरिक्ष॒सद्धोता॑ वेदि॒षदति॑थिर्दुरोण॒सत् । नृ॒षद्व॑र॒सदृ॑त॒सद्व्यो॑म॒सद॒ब्जा गो॒जा ऋ॑त॒जा अ॑द्रि॒जा ऋ॒तम् ॥ (५)
सूर्य दीप्तिशाली आकाश में रहते हैं. वायु अंतरिक्ष में निवास करते हैं. होता वेदी पर स्थित रहते हैं. अतिथि घर में निवास करते हैं. ऋत मनुष्यों में, उत्तम स्थान में, यज्ञ में एवं आकाश में निवास करते हैं तथा जल, सूर्यकिरणों, सत्य एवं पर्वतों में उत्पन्न हुए हैं. (५)
The sun lives in the bright sky. Air inhabits space. Would remain located on the altar. Guests reside in the house. The rite dwells in human beings, in the best place, in the yagna and in the sky, and in the water, the sunshine, the truth, and the mountains. (5)