हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.41.6

मंडल 4 → सूक्त 41 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
तो॒के हि॒ते तन॑य उ॒र्वरा॑सु॒ सूरो॒ दृशी॑के॒ वृष॑णश्च॒ पौंस्ये॑ । इन्द्रा॑ नो॒ अत्र॒ वरु॑णा स्याता॒मवो॑भिर्द॒स्मा परि॑तक्म्यायाम् ॥ (६)
हे इंद्र एवं वरुण! हमें पुत्र-पौत्र के साथ-साथ उपजाऊ भूमि की प्राप्ति कराने, बहुत समय तक सूर्य के दर्शन कराने एवं संतान उत्पत्ति की शक्ति प्रदान करने के लिए अंधेरी रात में रक्षासाधन लेकर तुम शत्रुओं के नाश को तैयार हो जाओ. (६)
O Indra and Varuna! Take the protection money in the dark night to give us the son and grandson as well as the fertile land, to see the sun for a long time and to give us the power of procreation, and be ready to destroy your enemies. (6)