हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.41.7

मंडल 4 → सूक्त 41 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
यु॒वामिद्ध्यव॑से पू॒र्व्याय॒ परि॒ प्रभू॑ती ग॒विषः॑ स्वापी । वृ॒णी॒महे॑ स॒ख्याय॑ प्रि॒याय॒ शूरा॒ मंहि॑ष्ठा पि॒तरे॑व श॒म्भू ॥ (७)
हे इंद्र एवं वरुण! हम गाय पाने की इच्छा से तुम्हारे पास प्रसिद्ध रक्षा की प्रार्थना लेकर आए हैं. तुम शक्तिशाली, बंधुतुल्य, शूर एवं अतिशय पूज्य देवों से हम उसी प्रकार मित्र एवं प्रेम मांगते हैं, जिस प्रकार पुत्र पिता से याचना करता है. (७)
O Indra and Varuna! We have brought to you the famous defense prayer with the desire to get a cow. We ask you powerful, bonded, brave and most revered gods in the same way that the Son begs the Father. (7)