हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.44.1

मंडल 4 → सूक्त 44 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
तं वां॒ रथं॑ व॒यम॒द्या हु॑वेम पृथु॒ज्रय॑मश्विना॒ संग॑तिं॒ गोः । यः सू॒र्यां वह॑ति वन्धुरा॒युर्गिर्वा॑हसं पुरु॒तमं॑ वसू॒युम् ॥ (१)
हे अश्विनीकुमारो! हम तुम्हारे शीघ्र चलने वाले एवं गायों से मिलाने वाले रथ को पुकारते हैं. वह रथ सूर्यकन्या को धारण करने वाला, बैठने के निमित्त काष्ठ आसन से युक्त, स्तुतियां प्राप्त करने वाला एवं अधिक संपत्ति युक्त है. (१)
O Ashwinikumaro! We call upon your fast-moving chariot and meeting the cows. The chariot is holding suryakanya, equipped with a wooden seat for sitting, receiving praises and having more wealth. (1)