हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.44.7

मंडल 4 → सूक्त 44 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
इ॒हेह॒ यद्वां॑ सम॒ना प॑पृ॒क्षे सेयम॒स्मे सु॑म॒तिर्वा॑जरत्ना । उ॒रु॒ष्यतं॑ जरि॒तारं॑ यु॒वं ह॑ श्रि॒तः कामो॑ नासत्या युव॒द्रिक् ॥ (७)
हे समान मन वाले अश्चिनीकुमारो! हम जो स्तुति तुम्हारे समीप भेजते हैं, वह हमारे लिए फल देने वाली हो. हे सुंदर अन्न वाले अश्विनीकुमारो! तुम स्तुति करने वाले की रक्षा करो. हे नासत्यो! हमारी कामना तुम्हारे ही आश्रित है. (७)
O ashchinikumaro with the same mind! The praise we send to you, let it bear fruit for us. O ashwinikumaro with beautiful food! You protect the praise-giver. O nastyo! Our desire is dependent on yours. (7)