हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.48.3

मंडल 4 → सूक्त 48 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 48
अनु॑ कृ॒ष्णे वसु॑धिती ये॒माते॑ वि॒श्वपे॑शसा । वाय॒वा च॒न्द्रेण॒ रथे॑न या॒हि सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ ॥ (३)
हे वायु! काले रंग वाले, धनों को धारण करने वाले एवं विश्वयुक्त धरती-आकाश तुम्हारे पीछे चलते हैं. तुम आनंददायक रथ द्वारा सोम पीने हेतु आओ. (३)
O air! The black-colored, the riches, and the world-rich earth and the sky follow you. You come to drink som by the pleasurable chariot. (3)