ऋग्वेद (मंडल 4)
त्रिर॒न्तरि॑क्षं सवि॒ता म॑हित्व॒ना त्री रजां॑सि परि॒भुस्त्रीणि॑ रोच॒ना । ति॒स्रो दिवः॑ पृथि॒वीस्ति॒स्र इ॑न्वति त्रि॒भिर्व्र॒तैर॒भि नो॑ रक्षति॒ त्मना॑ ॥ (५)
सविता देव अपने महत्त्व द्वारा सबको पराजित करते हुए तीनों अंतरिक्षों, तीनों लोकों एवं तीन तेजस्वी तत्त्वो-अग्नि, वायु और आदित्य, तीन स्वर्गो एवं तीन पृथ्वियों को व्याप्त करते हैं. वे तीन व्रतों द्वारा स्वयं हम सबका पालन करें. (५)
Savita Dev defeats everyone by her importance and encompasses the three realms, the three lokas and the three bright elements - Agni, Vayu and Aditya, three heavens and three earths. Let them follow all of us by themselves by three vows. (5)