हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.19.1

मंडल 5 → सूक्त 19 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 19
अ॒भ्य॑व॒स्थाः प्र जा॑यन्ते॒ प्र व॒व्रेर्व॒व्रिश्चि॑केत । उ॒पस्थे॑ मा॒तुर्वि च॑ष्टे ॥ (१)
जो अग्नि धरती-माता की गोद में स्थित पदार्थो को देखते हैं, वे ही वव्रि ऋषि की अशोभन दशाओं को जानकर दूर करें. (१)
The agnis that see the substances in the lap of the mother earth, should remove them by knowing the indecent conditions of the sage Vavi, who are. (1)