ऋग्वेद (मंडल 5)
यो म॒ इति॑ प्र॒वोच॒त्यश्व॑मेधाय सू॒रये॑ । दद॑दृ॒चा स॒निं य॒ते दद॑न्मे॒धामृ॑ताय॒ते ॥ (४)
हे अग्नि! जो धन का याचक दानी अश्वमेध नामक राजर्षि के पास आकर याचना करता है, उस स्तुतिकारी भिक्षुक को वे धन देते हैं. यज्ञ के इच्छुक उस अश्वमेध को तुम धन दो. (४)
O agni! They give money to the praise-giving monk who comes to the king named Dani Ashwamedha, who asks for money. You give money to that ashwamedha who wants to sacrifice. (4)