ऋग्वेद (मंडल 5)
अन॑स्वन्ता॒ सत्प॑तिर्मामहे मे॒ गावा॒ चेति॑ष्ठो॒ असु॑रो म॒घोनः॑ । त्रै॒वृ॒ष्णो अ॑ग्ने द॒शभिः॑ स॒हस्रै॒र्वैश्वा॑नर॒ त्र्य॑रुणश्चिकेत ॥ (१)
हे सकल मानवों के नेता, साधुओं का पालन करने वाले, अतिशय ज्ञानसंपन्न, बलवान् एवं धनस्वामी अग्नि! वृष्ण के पुत्र त्रयरुण नामक राजर्षि ने गाड़ी सहित दो बैल एवं दस हजार स्वर्ण मुद्राएं मुझे दीं. इस दान से वह प्रसिद्ध हो गया. (१)
O leader of the sakal human beings, the followers of the sadhus, the most knowledgeable, the strong and the wealthy agni! Rajarshi, named Trayrun, the son of Vrishna, gave me two bullocks and ten thousand gold coins along with the car. From this donation he became famous. (1)
ऋग्वेद (मंडल 5)
यो मे॑ श॒ता च॑ विंश॒तिं च॒ गोनां॒ हरी॑ च यु॒क्ता सु॒धुरा॒ ददा॑ति । वैश्वा॑नर॒ सुष्टु॑तो वावृधा॒नोऽग्ने॒ यच्छ॒ त्र्य॑रुणाय॒ शर्म॑ ॥ (२)
हे वैश्वानर! जिस त्र्यरुण ने मुझे सौ स्वर्णमुद्राएं, बीस गाएं एवं रथ में जुते हुए दो घोड़े दिए थे, तुम हमारी स्तुतियों द्वारा प्रज्वलित होकर उसे सुख दो. (२)
O global! The Trirune who gave me a hundred golden currencies, twenty cows and two horses in a chariot, you are ignited by our praises and give him pleasure. (2)
ऋग्वेद (मंडल 5)
ए॒वा ते॑ अग्ने सुम॒तिं च॑का॒नो नवि॑ष्ठाय नव॒मं त्र॒सद॑स्युः । यो मे॒ गिर॑स्तुविजा॒तस्य॑ पू॒र्वीर्यु॒क्तेना॒भि त्र्य॑रुणो गृ॒णाति॑ ॥ (३)
हे अग्नि! जिस त्र्यरुण ने बहुत संतान वाले हम लोगों की अनेक स्तुतियां सुनकर प्रसन्नतापूर्वक मन से विभिन्न वस्तुएं ग्रहण करने को कहा था, उसी प्रकार तुझ अतिशय स्तुति योग्य की अति नवीन स्तुतियों की कामना करने वाले त्रसदस्यु ने भी कहा था. (३)
O agni! Just as Trirune, who had heard many praises of us with many children, gladly asked us to accept various things with a heart, so did the Trisadsu, who wished for the most innovative praises of you who deserved your great praise. (3)
ऋग्वेद (मंडल 5)
यो म॒ इति॑ प्र॒वोच॒त्यश्व॑मेधाय सू॒रये॑ । दद॑दृ॒चा स॒निं य॒ते दद॑न्मे॒धामृ॑ताय॒ते ॥ (४)
हे अग्नि! जो धन का याचक दानी अश्वमेध नामक राजर्षि के पास आकर याचना करता है, उस स्तुतिकारी भिक्षुक को वे धन देते हैं. यज्ञ के इच्छुक उस अश्वमेध को तुम धन दो. (४)
O agni! They give money to the praise-giving monk who comes to the king named Dani Ashwamedha, who asks for money. You give money to that ashwamedha who wants to sacrifice. (4)
ऋग्वेद (मंडल 5)
यस्य॑ मा परु॒षाः श॒तमु॑द्ध॒र्षय॑न्त्यु॒क्षणः॑ । अश्व॑मेधस्य॒ दानाः॒ सोमा॑ इव॒ त्र्या॑शिरः ॥ (५)
हे अग्नि! अश्वमेध द्वारा की हुई कामना पूर्ण करने वाले बैलों ने मुझे इस प्रकार प्रसन्न किया है, जिस प्रकार दही, दूध एवं सत्तू से मिला हुआ सोम तुम्हें प्रसन्न करता है. (५)
O agni! The bulls who fulfilled the wishes of Ashwamedha have pleased me in this way, just as the som mixed with curd, milk and sattu pleases you. (5)
ऋग्वेद (मंडल 5)
इन्द्रा॑ग्नी शत॒दाव्न्यश्व॑मेधे सु॒वीर्य॑म् । क्ष॒त्रं धा॑रयतं बृ॒हद्दि॒वि सूर्य॑मिवा॒जर॑म् ॥ (६)
हे इंद्र एवं अग्नि! तुम याचकों को अनगिनत धन देने वाले अश्वमेध के लिए आकाश स्थित सूर्य के समान शोभन बलयुक्त महान् एवं अमर धन दो. (६)
O Indra and Agni! Give you great and immortal wealth with the same strength as the sun in the sky for ashwamedha, which gives countless wealth to the priests. (6)