हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.28.4

मंडल 5 → सूक्त 28 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 28
समि॑द्धस्य॒ प्रम॑ह॒सोऽग्ने॒ वन्दे॒ तव॒ श्रिय॑म् । वृ॒ष॒भो द्यु॒म्नवा॑ँ असि॒ सम॑ध्व॒रेष्वि॑ध्यसे ॥ (४)
हे प्रज्वलित एवं परम तेजस्वी अग्नि! हम यजमान तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम कामवर्षी एवं धनवान्‌ हो तथा यज्ञों में भली प्रकार प्रज्वलित होते हो. (४)
O blazing and the ultimate glorious agni! We host you to praise you. You are a workman and a rich man and are well lit up in the yagnas. (4)