ऋग्वेद (मंडल 5)
आयं ज॑ना अभि॒चक्षे॑ जगा॒मेन्द्रः॒ सखा॑यं सु॒तसो॑ममि॒च्छन् । वद॒न्ग्रावाव॒ वेदिं॑ भ्रियाते॒ यस्य॑ जी॒रम॑ध्व॒र्यव॒श्चर॑न्ति ॥ (१२)
हे मनुष्यो! सोम निचोड़ने वाले अपने मित्र यजमानों की इच्छा करते हुए इंद्र तुम्हें धन देने के लिए आते हैं. अध्वर्यु जिस सोमरस निचोड़ने के साधन पत्थर को चलाते हैं, वह शब्द करता हुआ यज्ञवेदी पर पहुंचता है. (१२)
O men! Indra comes to give you money while wishing for his friend hosts who squeeze soma. The somras which the somras, which run the stone to squeeze, reaches the yajnavedi with the word. (12)