ऋग्वेद (मंडल 5)
यस्याव॑धीत्पि॒तरं॒ यस्य॑ मा॒तरं॒ यस्य॑ श॒क्रो भ्रात॑रं॒ नात॑ ईषते । वेतीद्व॑स्य॒ प्रय॑ता यतंक॒रो न किल्बि॑षादीषते॒ वस्व॑ आक॒रः ॥ (४)
इंद्र ने जिस अयज्ञकर्ता के पिता, माता एवं भ्राता का वध किया था, उसके समीप से भी वे दूर नहीं जाते, अपितु उसके द्वारा दिए गए हव्य की कामना करते हैं. शासनकर्ता एवं धनस्वामी इंद्र पाप से दूर नहीं भागते. (४)
They do not go far from near the aygikar whose father, mother and brother-in-law Indra killed, but they wish for the good given by him. Indra, the ruler and the richest, does not run away from sin. (4)