ऋग्वेद (मंडल 5)
न प॒ञ्चभि॑र्द॒शभि॑र्वष्ट्या॒रभं॒ नासु॑न्वता सचते॒ पुष्य॑ता च॒न । जि॒नाति॒ वेद॑मु॒या हन्ति॑ वा॒ धुनि॒रा दे॑व॒युं भ॑जति॒ गोम॑ति व्र॒जे ॥ (५)
इंद्र शत्रुओं का नाश करने के लिए पांच या दस सहायकों की इच्छा नहीं करते. सोम न निचोड़ने वाले एवं अपने बांधवों का पोषण न करने वाले के साथ इंद्र नहीं मिलते, ऐसे लोगों को वे कष्ट देते हैं अथवा मार डालते हैं एवं अपने भक्त को गायों से पूर्ण गोशाला का अधिकारी बनाते हैं. (५)
Indra does not wish for five or ten helpers to destroy enemies. Indra does not meet those who do not squeeze som and do not nurture their brothers, such people they suffer or kill and make their devotee the possessor of a complete goshala from cows. (5)