ऋग्वेद (मंडल 5)
मा मामि॒मं तव॒ सन्त॑मत्र इर॒स्या द्रु॒ग्धो भि॒यसा॒ नि गा॑रीत् । त्वं मि॒त्रो अ॑सि स॒त्यरा॑धा॒स्तौ मे॒हाव॑तं॒ वरु॑णश्च॒ राजा॑ ॥ (७)
सूर्य ने अत्रि से कहा-“हे अत्रि! इस प्रकार की अवस्था में पड़ा मैं तुम्हारा सेवक हूं. इस अन्न की इच्छा के कारण द्रोह करने वाले असुर भयजनक अंधकार द्वारा मुझे न निगल लें. तुम मेरे मित्र एवं सत्य का पालन करने वाले हो. तुम एवं वरुण मेरी रक्षा करो.” (७)
The sun said to Atri, "O Atri! I am your servant in this kind of state. Do not swallow me by the fearsome darkness of the asuras who are inciting hatred because of the desire for this food. You are my friend and the one who follows the truth. You and Varun protect me." (7)