ऋग्वेद (मंडल 5)
प्र स॒क्षणो॑ दि॒व्यः कण्व॑होता त्रि॒तो दि॒वः स॒जोषा॒ वातो॑ अ॒ग्निः । पू॒षा भगः॑ प्रभृ॒थे वि॒श्वभो॑जा आ॒जिं न ज॑ग्मुरा॒श्व॑श्वतमाः ॥ (४)
यज्ञ को स्वीकार करने वाले, मेधावियों द्वारा बुलाए गए, तीन स्थानों में उत्पन्न होकर भी सूर्य के समान प्रसन्नता देने वाले एवं विश्वरक्षक वायु, अग्नि एवं पूषा देव हमारे यज्ञ में आशुगामी अश्व के समान शीघ्र आवें. (४)
May the god who accepts the yajna, called by the meritorious, who is born in three places, who gives happiness like the sun and the world-keeper vayu, agni and pusha, come to our yajna as soon as the ashugami horse. (4)