हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.42.11

मंडल 5 → सूक्त 42 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 42
तमु॑ ष्टुहि॒ यः स्वि॒षुः सु॒धन्वा॒ यो विश्व॑स्य॒ क्षय॑ति भेष॒जस्य॑ । यक्ष्वा॑ म॒हे सौ॑मन॒साय॑ रु॒द्रं नमो॑भिर्दे॒वमसु॑रं दुवस्य ॥ (११)
हे आत्मा! तुम उन्हीं रुद्रदेव की स्तुति करो, जो शोभन-धनुष वाले एवं सभी ओषधियों के स्वामी हैं, महान्‌ आत्म-कल्याण के लिए उन्हीं शक्तिशाली रुद्र का यज्ञ एवं सेवा करो. (११)
Oh soul! Praise the same Rudradeva, who is the lord of all the robes and the lord of all the herbs, perform yajna and service to the same powerful Rudra for the great self-welfare. (11)