हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.42.12

मंडल 5 → सूक्त 42 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 42
दमू॑नसो अ॒पसो॒ ये सु॒हस्ता॒ वृष्णः॒ पत्नी॑र्न॒द्यो॑ विभ्वत॒ष्टाः । सर॑स्वती बृहद्दि॒वोत रा॒का द॑श॒स्यन्ती॑र्वरिवस्यन्तु शु॒भ्राः ॥ (१२)
दानशील मन वाले एवं हाथ से कुशलतापूर्वक शोभनकर्म करने वाले ऋभुगण वर्षा करने वाले इंद्र की पत्नियां सरिताएं विभु द्वारा निर्मित सरस्वती नदी व परम दीप्तिशालिनी राका कामनाएं पूर्ण करने वाली एवं दीप्त हैं. वे हमें धन दें. (१२)
The wives of Indra, who are with a charitable mind and performs good deeds efficiently by hand, are the daughters of Indra who perform the saraswati river and the ultimate deepthishali raka built by Vibhu, fulfilling the wishes and the brightest. They give us money. (12)