ऋग्वेद (मंडल 5)
सम॒श्विनो॒रव॑सा॒ नूत॑नेन मयो॒भुवा॑ सु॒प्रणी॑ती गमेम । आ नो॑ र॒यिं व॑हत॒मोत वी॒राना विश्वा॑न्यमृता॒ सौभ॑गानि ॥ (१८)
हम अश्विनीकुमारों की परम नवीन एवं सुख देने वाली रक्षा का अनुभव करें. हे मरणरहित अश्चिनीकुमारो! तुम हमें धन, वीर पुत्र एवं सौभाग्य दो. (१८)
Let us experience the ultimate new and pleasing defense of the Ashwinikumaras. O mortal aschinikumaro! You give us wealth, brave sons and good fortune. (18)