हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.44.10

मंडल 5 → सूक्त 44 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
स हि क्ष॒त्रस्य॑ मन॒सस्य॒ चित्ति॑भिरेवाव॒दस्य॑ यज॒तस्य॒ सध्रेः॑ । अ॒व॒त्सा॒रस्य॑ स्पृणवाम॒ रण्व॑भिः॒ शवि॑ष्ठं॒ वाजं॑ वि॒दुषा॑ चि॒दर्ध्य॑म् ॥ (१०)
हम क्षत्र, मनस, अवद, यजत, सध्रि एवं अवत्सार नामक ऋषि विद्वानों के भी पूज्य एवं सबके कामपूरक सूर्य से ज्ञानियों द्वारा भोगने योग्य अन्न की पूर्ति कराते हैं. (१०)
We also provide the food that is enjoyable by the wise from the sun, which is the worshiper of sage scholars named Ksat, Manas, Avad, Yajat, Sadhri and Avtasar and the full sun of all. (10)