हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.50.1

मंडल 5 → सूक्त 50 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
विश्वो॑ दे॒वस्य॑ ने॒तुर्मर्तो॑ वुरीत स॒ख्यम् । विश्वो॑ रा॒य इ॑षुध्यति द्यु॒म्नं वृ॑णीत पु॒ष्यसे॑ ॥ (१)
सभी मनुष्य सविता देव से मित्रता की याचना करें, सब लोग उनसे धन की कामना करें एवं पुष्टि के लिए धन पावें. (१)
Let all human beings beg for friendship with Savita Dev, let all people wish her money and get money for confirmation. (1)