ऋग्वेद (मंडल 5)
यत्र॒ वह्नि॑र॒भिहि॑तो दु॒द्रव॒द्द्रोण्यः॑ प॒शुः । नृ॒मणा॑ वी॒रप॒स्त्योऽर्णा॒ धीरे॑व॒ सनि॑ता ॥ (४)
जिस यज्ञ में यज्ञ को धारण करने वाला एवं यूप से बांधने योग्य पशु यूप के पास जाता है. उस यज्ञ में यजमान वीर पत्नियां, पुत्र, घर, धरती, धन आदि पाता है. (४)
In which the yajna is the one who holds the yajna and is able to tie the yupe to the yup. In that yajna, the host finds heroic wives, sons, houses, earth, wealth, etc. (4)