ऋग्वेद (मंडल 5)
तं वः॒ शर्धं॒ रथा॑नां त्वे॒षं ग॒णं मारु॑तं॒ नव्य॑सीनाम् । अनु॒ प्र य॑न्ति वृ॒ष्टयः॑ ॥ (१०)
हे मरुतो! तुम्हारे नवीन रथों के वेग एवं दीप्ति की हम प्रशंसा करते हैं. वर्षा मरुतों के पीछे-पीछे चलती है. (१०)
O Maruto! We admire the speed and brightness of your new chariots. The rain follows the maruts. (10)