ऋग्वेद (मंडल 5)
आ या॑त मरुतो दि॒व आन्तरि॑क्षाद॒मादु॒त । माव॑ स्थात परा॒वतः॑ ॥ (८)
हे मरुतो! तुम अंतरिक्ष, स्वर्ग अथवा इहलोक से यहां आओ. तुम दूरवर्ती स्थान में मत रहो. (८)
O Maruto! You come here from space, heaven or ihlok. Don't stay in a remote place. (8)