ऋग्वेद (मंडल 5)
अंसे॑षु व ऋ॒ष्टयः॑ प॒त्सु खा॒दयो॒ वक्ष॑स्सु रु॒क्मा म॑रुतो॒ रथे॒ शुभः॑ । अ॒ग्निभ्रा॑जसो वि॒द्युतो॒ गभ॑स्त्योः॒ शिप्राः॑ शी॒र्षसु॒ वित॑ता हिर॒ण्ययीः॑ ॥ (११)
हे मरुतो! तुम्हारे कंधों पर आयुध, पैरों में कटक, सीने पर हार एवं रथों पर दीप्ति विराजमान हैं. तुम्हारे हाथों में अग्नि के समान चमकने वाली बिजली तथा शीशों पर विस्तृत सुनहरी पगड़ी है. (११)
O Maruto! There are arms on your shoulders, ridges in your feet, necklaces on your chest and lights on chariots. You have in your hands lightning shining like agni and a golden turban wide on the glasses. (11)