ऋग्वेद (मंडल 5)
प्र शर्धा॑य॒ मारु॑ताय॒ स्वभा॑नव इ॒मां वाच॑मनजा पर्वत॒च्युते॑ । घ॒र्म॒स्तुभे॑ दि॒व आ पृ॑ष्ठ॒यज्व॑ने द्यु॒म्नश्र॑वसे॒ महि॑ नृ॒म्णम॑र्चत ॥ (१)
स्वायत्त, तेज वाले, पर्वतों को च्युत करने वाले, धूप का शोषण करने वाले, स्वर्ग से आने वाले, रथ के उपरिभाग पर विराजमान एवं तेजस्वी अन्न वाले मरुतों के बल की प्रशंसा करो तथा उन्हें पर्याप्त अन्न दो. (१)
Praise the strength of the autonomous, the bright, the mountains, the ones who exploit the sun, those who come from heaven, those who sit on the top of the chariot and have bright food, and give them enough food. (1)
ऋग्वेद (मंडल 5)
प्र वो॑ मरुतस्तवि॒षा उ॑द॒न्यवो॑ वयो॒वृधो॑ अश्व॒युजः॒ परि॑ज्रयः । सं वि॒द्युता॒ दध॑ति॒ वाश॑ति त्रि॒तः स्वर॒न्त्यापो॒ऽवना॒ परि॑ज्रयः ॥ (२)
हे मरुतो! तुम्हारे दीप्त, जगत् की रक्षा के लिए जल के इच्छुक, अन्न की वृद्धि करने वाले, चलने के लिए रथ में जोड़ने वाले सभी ओर गमनशील, बिजली के साथ संगत होने वाले व तीन स्थानों में शब्द करने वाले गण प्रकट होते हैं एवं जलराशि धरती पर गिरने लगती है. (२)
O Maruto! Your hapht, desirous of water to protect the world, those who increase food, those who join the chariot to walk, are seen on all sides moving, compatible with electricity and speaking words in three places, and the water sign begins to fall on the earth. (2)
ऋग्वेद (मंडल 5)
वि॒द्युन्म॑हसो॒ नरो॒ अश्म॑दिद्यवो॒ वात॑त्विषो म॒रुतः॑ पर्वत॒च्युतः॑ । अ॒ब्द॒या चि॒न्मुहु॒रा ह्रा॑दुनी॒वृतः॑ स्त॒नय॑दमा रभ॒सा उदो॑जसः ॥ (३)
बिजलीरूपी तेज वाले, वर्षा आदि के नेता, पत्थरों के आयुध वाले, दीप्ति प्राप्त करने वाले, पर्वतों को च्युत करने वाले, बार-बार जल देने वाले, वज्र को प्रेरित करने वाले, मिलकर गर्जन करने वाले एवं उद्धृत बलसंपन्न मरुद्गण वर्षा के निमित्त प्रकट होते हैं. (३)
The leaders of lightning, the leaders of rain, etc., the armaments of stones, the ones who receive the light, those who destroy the mountains, the ones who give water again and again, the ones who inspire the thunderbolt, the thunderers together and the cited force-laden deserters appear for the rain. (3)
ऋग्वेद (मंडल 5)
व्य१॒॑क्तून्रु॑द्रा॒ व्यहा॑नि शिक्वसो॒ व्य१॒॑न्तरि॑क्षं॒ वि रजां॑सि धूतयः । वि यदज्रा॒ँ अज॑थ॒ नाव॑ ईं यथा॒ वि दु॒र्गाणि॑ मरुतो॒ नाह॑ रिष्यथ ॥ (४)
हे रुद्रो! तुम रात्रि एवं दिन को प्रकट करो. हे सर्वथा समर्थ मरुतो! तुम अंतरिक्ष तथा अन्य लोकों को विस्तृत करो. हे कंपाने वाले मरुतो! सागर जिस प्रकार नाव को हिलाता है, उसी प्रकार तुम बादलों को चंचल बनाओ एवं शन्रुनगरों को नष्ट करो. हे मरुतो! हमारी हिंसा मत करना. (४)
Hey Rudra! You reveal the night and the day. O you absolutely capable Maruto! You expand the space and other realms. O you who tremble, Marutto! Just as the sea moves the boat, so do you make the clouds fickle and destroy the shanrunagars. O Maruto! Don't do our violence. (4)
ऋग्वेद (मंडल 5)
तद्वी॒र्यं॑ वो मरुतो महित्व॒नं दी॒र्घं त॑तान॒ सूर्यो॒ न योज॑नम् । एता॒ न यामे॒ अगृ॑भीतशोचि॒षोऽन॑श्वदां॒ यन्न्यया॑तना गि॒रिम् ॥ (५)
हे मरुतो! जिस प्रकार सूर्य अपना प्रकाश फैलाते हैं अथवा देवों के घोड़े दूर-दूर तक जाते हैं, उसी प्रकार स्तोता तुम्हारे बल एवं महत्त्व को दूर तक प्रसिद्ध बनाते हैं. हे मरुतो! तुमने उस पर्वत को तोड़ा था, जिस में पणियों ने चुराए हुए घोड़े छिपाए थे. (५)
O Maruto! Just as the sun spreads its light or the horses of the gods go far and wide, so the stosthas make your strength and importance famous far and wide. O Maruto! You broke the mountain in which the pangs hid the stolen horses. (5)
ऋग्वेद (मंडल 5)
अभ्रा॑जि॒ शर्धो॑ मरुतो॒ यद॑र्ण॒सं मोष॑था वृ॒क्षं क॑प॒नेव॑ वेधसः । अध॑ स्मा नो अ॒रम॑तिं सजोषस॒श्चक्षु॑रिव॒ यन्त॒मनु॑ नेषथा सु॒गम् ॥ (६)
हे वर्षा करने वाले एवं वृक्षों के समान बादलों को कंपित करने वाले मरुतो! तुम्हारी शक्ति सुशोभित हो रही है. हे परस्पर प्रीतिसंपन्न मरुतो! जिस प्रकार आंखें मार्ग प्रदर्शन करती हैं, उसी प्रकार तुम हमें सरल मार्ग से रमणीय धन के समीप पहुंचाओ. (६)
O Maruto, who rains and vibrates like trees, the clouds! Your power is being embellished. O mutually loving Maruto! Just as the eyes show the way, so you bring us closer to delightful wealth by the simple way. (6)
ऋग्वेद (मंडल 5)
न स जी॑यते मरुतो॒ न ह॑न्यते॒ न स्रे॑धति॒ न व्य॑थते॒ न रि॑ष्यति । नास्य॒ राय॒ उप॑ दस्यन्ति॒ नोतय॒ ऋषिं॑ वा॒ यं राजा॑नं वा॒ सुषू॑दथ ॥ (७)
हे मरुतो! तुम जिस ऋषि या राजा को यज्ञकर्म में लगाते हो, वह दूसरों द्वारा न हारता है और न मारा जाता है. वह न क्षीण होता है, न कष्ट पाता है और न उसे कोई बाधा पहुंचा सकता है. उसका धन एवं रक्षा साधन भी कभी समाप्त नहीं होते. (७)
O Maruto! The sage or king you employ in the yagnakarma is not defeated or killed by others. He does not fade, he does not suffer, nor can he be hindered. His money and defense are also never exhausted. (7)
ऋग्वेद (मंडल 5)
नि॒युत्व॑न्तो ग्राम॒जितो॒ यथा॒ नरो॑ऽर्य॒मणो॒ न म॒रुतः॑ कब॒न्धिनः॑ । पिन्व॒न्त्युत्सं॒ यदि॒नासो॒ अस्व॑र॒न्व्यु॑न्दन्ति पृथि॒वीं मध्वो॒ अन्ध॑सा ॥ (८)
नियुत नाम वाले घोड़ों के स्वामी, संयुक्त पदार्थो को पृथक् करने वाले तथा नेता, सूर्य के समान तेजस्वी मरुद्गण जल से युक्त होते हैं. वे शक्तिशाली बनकर कुएं, तालाब आदि निचले स्थानों को जल से भर देते हैं एवं शब्द करते हुए धरती को मधुर जल से सींच देते हैं. (८)
The owners of horses with the name Jute, the separation of joint matter and the leader, the bright deserts like the sun, are of water. They become powerful and fill the low lying places like wells, ponds, etc. with water and water the earth with sweet water while making words. (8)