ऋग्वेद (मंडल 5)
तं वः॒ शर्धं॑ रथे॒शुभं॑ त्वे॒षं प॑न॒स्युमा हु॑वे । यस्मि॒न्सुजा॑ता सु॒भगा॑ मही॒यते॒ सचा॑ म॒रुत्सु॑ मीळ्हु॒षी ॥ (९)
हे मरुतो! हम सुशोभित, दीप्त, स्तुतियोग्य तुम्हारे उस रथ का आह्वान करते हैं, जिस में शोभन उत्पत्ति वाली व सौभाग्य वाली मरुत्माता विराजती है. (९)
O Maruto! We call upon the adorned, bright, praiseworthy chariot of yours, in which the desert mother of adornment and good fortune is victorious. (9)