हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.60.6

मंडल 5 → सूक्त 60 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
यदु॑त्त॒मे म॑रुतो मध्य॒मे वा॒ यद्वा॑व॒मे सु॑भगासो दि॒वि ष्ठ । अतो॑ नो रुद्रा उ॒त वा॒ न्व१॒॑स्याग्ने॑ वि॒त्ताद्ध॒विषो॒ यद्यजा॑म ॥ (६)
हे मरुतो! तुम उत्तम, मध्यम एवं अधम स्वर्ग में रहते हो. हे रुद्रपुत्रो! इन तीनों स्थानों से हमारे पास आओ. हे अग्नि! हम जो हव्य तुम्हें दें, उसे तुम जानो. (६)
O Maruto! You live in the best, middle and low heaven. O rudraputras! Come to us from these three places. O agni! You know what we give you. (6)