हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.61.12

मंडल 5 → सूक्त 61 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
येषां॑ श्रि॒याधि॒ रोद॑सी वि॒भ्राज॑न्ते॒ रथे॒ष्वा । दि॒वि रु॒क्म इ॑वो॒परि॑ ॥ (१२)
जिन मरुतों की शोभा से धरती और आकाश चमक उठते हैं, वे रथों पर इस प्रकार बैठते हैं, जैसे स्वर्ग में सूर्य विराजता है. (१२)
The maruts whose splendor makes the earth and the sky shine sit on chariots as the sun shines in heaven. (12)