हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.61.11

मंडल 5 → सूक्त 61 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
य ईं॒ वह॑न्त आ॒शुभिः॒ पिब॑न्तो मदि॒रं मधु॑ । अत्र॒ श्रवां॑सि दधिरे ॥ (११)
जो मरुद्गण तेज घोड़ों द्वारा लाए गए थे, वे मदकारक सोमरस पीते हुए यहां भांति- भांति की स्तुतियां सुनते हैं. (११)
The deserters who were brought by fast horses listen to a variety of praises here while drinking the madman somras. (11)