ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒त मे॑ वोचता॒दिति॑ सु॒तसो॑मे॒ रथ॑वीतौ । न कामो॒ अप॑ वेति मे ॥ (१८)
हे रात्रिदेवी! सोमरस निचोड़ने वाले रथवीति से तुम यह कहना कि उसकी पुत्री के प्रति मुझ श्यावाश्व का लगाव कम नहीं हुआ है. (१८)
O goddess of the night! You should say to the charioteer who squeezes somers that my love for his daughter has not diminished. (18)