ऋग्वेद (मंडल 5)
ए॒तं मे॒ स्तोम॑मूर्म्ये दा॒र्भ्याय॒ परा॑ वह । गिरो॑ देवि र॒थीरि॑व ॥ (१७)
हे रात्रिदेवी! तुम मेरी इस स्तुति को मेरे पास से रथवीति के पास ले जाओ. रथस्वामी जिस प्रकार रथ पर सामान ले जाता है, उसी प्रकार तुम इन्हें पहुंचाओ. (१७)
O goddess of the night! You take this praise of Mine from me to rathveeti. Just as the chariot owner carries the goods on the chariot, so you deliver them. (17)