हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.62.3

मंडल 5 → सूक्त 62 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
अधा॑रयतं पृथि॒वीमु॒त द्यां मित्र॑राजाना वरुणा॒ महो॑भिः । व॒र्धय॑त॒मोष॑धीः॒ पिन्व॑तं॒ गा अव॑ वृ॒ष्टिं सृ॑जतं जीरदानू ॥ (३)
हे स्तोताओं को राजा बनाने वाले मित्र एवं वरुण! तुम अपने तेजों से धरती-आकाश को धारण किए हो. हे शीघ्र दान करने वाले मित्र व वरुण! तुम ओषधियों को विस्तृत करो. गायों की संख्या बढ़ाओ तथा जल बरसाओ. (३)
These are the friends and Varuna who make the Psalms king! You have possessed the earth and the sky with your brightness. O fast-donating friend and Varun! You elaborate the herbs. Increase the number of cows and pour water. (3)