हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.63.7

मंडल 5 → सूक्त 63 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
धर्म॑णा मित्रावरुणा विपश्चिता व्र॒ता र॑क्षेथे॒ असु॑रस्य मा॒यया॑ । ऋ॒तेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं॒ वि रा॑जथः॒ सूर्य॒मा ध॑त्थो दि॒वि चित्र्यं॒ रथ॑म् ॥ (७)
हे बुद्धिसंपन्न मित्र व वरुण! तुम वर्षा द्वारा यज्ञ की रक्षा करते हो एवं बादलों की माया के कारण जल के द्वारा सारे संसार को सुशोभित बनाते हो. तुम गतिशील एवं पूज्य सूर्य को आकाश में धारण करो. (७)
O wise friend and Varuna! You protect the yajna by rain and beautify the whole world through water because of the maya of the clouds. You hold the moving and revered sun in the sky. (7)