हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.64.1

मंडल 5 → सूक्त 64 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
वरु॑णं वो रि॒शाद॑समृ॒चा मि॒त्रं ह॑वामहे । परि॑ व्र॒जेव॑ बा॒ह्वोर्ज॑ग॒न्वांसा॒ स्व॑र्णरम् ॥ (१)
हम इस मंत्र द्वारा शत्रुनाशक, स्वर्ग के नेता एवं बाहुबल से गोसमूह के समान आगे बढ़ने वाले मित्र एवं वरुण का आह्वान करते हैं. (१)
Through this mantra, we invoke the enemies, the leader of heaven and the leader of the muscle power and the friend and Varuna who move forward like a go-group. (1)