ऋग्वेद (मंडल 5)
विश्वे॒ हि वि॒श्ववे॑दसो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । व्र॒ता प॒देव॑ सश्चिरे॒ पान्ति॒ मर्त्यं॑ रि॒षः ॥ (३)
सब कुछ जानने वाले मित्र, वरुण, एवं अर्यमा अपने-अपने पद के अनुरूप हमारे यज्ञ में सम्मिलित होते हैं एवं हिंसकों से भक्तों की रक्षा करते हैं. (३)
Friends who know everything, Varuna, and Aryama, in accordance with their respective positions, join our yagna and protect the devotees from the violent. (3)