ऋग्वेद (मंडल 5)
उप॑ नः सु॒तमा ग॑तं॒ वरु॑ण॒ मित्र॑ दा॒शुषः॑ । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (३)
हे मित्र व वरुण! हम हव्यदाताओं द्वारा निचोड़े गए सोम को पीने के लिए आओ. (३)
Oh my friend and Varun! We come to drink the mon squeezed by the havyadatas. (3)
मंडल 5 → सूक्त 71 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation