हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.87.7

मंडल 5 → सूक्त 87 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 87
ते रु॒द्रासः॒ सुम॑खा अ॒ग्नयो॑ यथा तुविद्यु॒म्ना अ॑वन्त्वेव॒याम॑रुत् । दी॒र्घं पृ॒थु प॑प्रथे॒ सद्म॒ पार्थि॑वं॒ येषा॒मज्मे॒ष्वा म॒हः शर्धां॒स्यद्भु॑तैनसाम् ॥ (७)
वे रुद्रपुत्र एवं अग्नि के समान शोभन यज्ञों वाले मरुत्‌ एवयामरुत्‌ की रक्षा करें, जिनके कारण अंतरिक्षरूपी दीर्घ एवं विस्तृत गृह प्रसिद्ध हुआ है एवं जिन पापरहित मरुतों की गति में महान्‌ बल है. (७)
May the sons of Rudra and the Maruts, who perform beautiful yagya like fire protect Yamaruts, for whom the long and vast abode in the form of space is famous, and whose misdeed-less Maruts have great strength in movement. (7)