हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.3

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
वेत्था॒ हि वे॑धो॒ अध्व॑नः प॒थश्च॑ दे॒वाञ्ज॑सा । अग्ने॑ य॒ज्ञेषु॑ सुक्रतो ॥ (३)
हे यज्ञविधाता एवं शोभनयज्ञकर्मयुक्त अग्नि! तुम यज्ञ में देवों के छोटे एवं बड़े मार्गों को शीघ्रता से जानते हो. (३)
O agni with yajnavidhata and shobhanayagyakarma! You know quickly the small and big ways of the gods in the yagna. (3)