हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.4

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
त्वामी॑ळे॒ अध॑ द्वि॒ता भ॑र॒तो वा॒जिभिः॑ शु॒नम् । ई॒जे य॒ज्ञेषु॑ य॒ज्ञिय॑म् ॥ (४)
हे अग्नि! भरत ने सुख पाने के लिए ऋत्विजों के साथ मिलकर तुम्हारी स्तुति की थी एवं तुझ यज्ञयोग्य अग्नि का हव्यान्नों द्वारा यजन किया था. (४)
O agni! Bharata had praised you together with the ritvijas to get happiness and had made you use the sacrificial agni through the havanas. (4)