ऋग्वेद (मंडल 6)
त्वं तं दे॑व जि॒ह्वया॒ परि॑ बाधस्व दु॒ष्कृत॑म् । मर्तो॒ यो नो॒ जिघां॑सति ॥ (३२)
हे अग्नि देव! उस दुष्ट व्यक्ति को तुम अपनी ज्वालाओं द्वारा भली प्रकार जलाओ, जो हमारी हिंसा करना चाहता है. (३२)
O God of agni! Burn well by your flames the wicked one who wants to do us violence. (32)