हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.33

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
भ॒रद्वा॑जाय स॒प्रथः॒ शर्म॑ यच्छ सहन्त्य । अग्ने॒ वरे॑ण्यं॒ वसु॑ ॥ (३३)
हे शत्रुओं को पराजित करने वाले अग्नि! मुझ भरद्वाज को तुम विस्तृत सुख एवं चाहने योग्य धन दो. (३३)
O agni that defeats enemies! Give me vast pleasures and desirable wealth. (33)