ऋग्वेद (मंडल 6)
उप॑ त्वा र॒ण्वसं॑दृशं॒ प्रय॑स्वन्तः सहस्कृत । अग्ने॑ ससृ॒ज्महे॒ गिरः॑ ॥ (३७)
हे बलपुत्र एवं शोभनदर्शन वाले अग्नि! इव्यान्न धारण करने वाले हम तुम्हारे लिए स्तुतियां बोलते हैं. (३७)
O son of strength and agni of adornment! We speak praises for you who hold the will. (37)