हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.37

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 37 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
उप॑ त्वा र॒ण्वसं॑दृशं॒ प्रय॑स्वन्तः सहस्कृत । अग्ने॑ ससृ॒ज्महे॒ गिरः॑ ॥ (३७)
हे बलपुत्र एवं शोभनदर्शन वाले अग्नि! इव्यान्न धारण करने वाले हम तुम्हारे लिए स्तुतियां बोलते हैं. (३७)
O son of strength and agni of adornment! We speak praises for you who hold the will. (37)