हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.38

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 38 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
उप॑ च्छा॒यामि॑व॒ घृणे॒रग॑न्म॒ शर्म॑ ते व॒यम् । अग्ने॒ हिर॑ण्यसंदृशः ॥ (३८)
हे स्वर्ण के समान प्रकाशयुक्त तेज वाले एवं दीप्तिसंपन्न अग्नि! इम छाया के समान तुम्हारी शरण में आते हैं. (३८)
O bright and bright agni as gold! I come to your refuge like shadows. (38)