हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.42

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 42 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
आ जा॒तं जा॒तवे॑दसि प्रि॒यं शि॑शी॒ताति॑थिम् । स्यो॒न आ गृ॒हप॑तिम् ॥ (४२)
हे अध्वर्युगण! उत्पन्न हुए, अतिथि के समान पूज्य एवं गृहस्वामी अग्नि को जातवेद नामक सुखकर अग्नि में स्थित करो. (४२)
O teacher! If born, worship like a guest and the homeowner, place the agni in a happy agni called jatveda. (42)